आधुनिक भारतीय इतिहास में गवर्नर-जनरल और वायसराय का विषय UPSC Civil Services, HPSC HCS, UPPSC, BPSC और MPPSC के प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा दोनों के लिए सर्वाधिक अंकदायी (High-Yield) खंड है। ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासनिक संरचना, भू-राजस्व व्यवस्थाएं (स्थाई बंदोबस्त, रैयतवाड़ी, महालवाड़ी), साम्राज्य विस्तार की नीतियां (सहायक संधि, व्यपगत का सिद्धांत), शिक्षा व प्रेस सुधार, अकाल आयोग और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की प्रमुख घटनाएं सीधे तौर पर इन प्रशासकों के कालक्रम से जुड़ी हैं।
1. पदनाम और संवैधानिक अधिकारों का क्रमिक विकास (Evolution of Designation)
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के एक व्यापारिक निगम से भारत की सर्वोच्च राजनीतिक शक्ति बनने के साथ ही गवर्नर के पद और उसकी कार्यपालक शक्तियों में चार युगांतरकारी संवैधानिक बदलाव हुए:
⚡ त्वरित परीक्षा सारांश: 4 ऐतिहासिक संवैधानिक मील के पत्थर (AEO Summary):
- बंगाल का गवर्नर (1757–1773): प्लासी के युद्ध (1757) के बाद रॉबर्ट क्लाइव बंगाल का पहला गवर्नर बना।
- बंगाल का गवर्नर-जनरल (1773–1833): 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी को कलकत्ता के अधीन किया गया। वॉरेन हेस्टिंग्स बंगाल का प्रथम गवर्नर-जनरल बना।
- भारत का गवर्नर-जनरल (1833–1858): 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को संपूर्ण ‘भारत का गवर्नर-जनरल’ बना दिया गया और अखिल भारतीय विधायी शक्तियां प्रदान की गईं। लॉर्ड विलियम बेंटिक भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल बना।
- भारत का वायसराय एवं गवर्नर-जनरल (1858–1947): 1857 की क्रांति के बाद 1858 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा कंपनी का शासन समाप्त कर भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन के अधीन आया। गवर्नर-जनरल अब ब्रिटिश सम्राट का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि बना, जिसे वायसराय कहा गया। लॉर्ड कैनिंग भारत का प्रथम वायसराय बना।
- स्वतंत्र भारत के गवर्नर-जनरल: 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन बने तथा प्रथम व अंतिम भारतीय गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी (1948–1950) बने।
| संवैधानिक पदनाम | संवैधानिक अधिनियम | प्रथम पदधारक | अंतिम पदधारक | मुख्य प्रशासनिक शक्ति |
|---|---|---|---|---|
| बंगाल का गवर्नर | ईस्ट इंडिया कंपनी चार्टर (1757) | रॉबर्ट क्लाइव (1757) | वॉरेन हेस्टिंग्स (1773) | केवल बंगाल प्रेसीडेंसी का व्यापारिक व सैन्य नियंत्रण |
| बंगाल का गवर्नर-जनरल | 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट | वॉरेन हेस्टिंग्स (1773) | लॉर्ड विलियम बेंटिक (1833) | मद्रास व बॉम्बे प्रेसीडेंसी पर सर्वोच्च अधीक्षण अधिकार |
| भारत का गवर्नर-जनरल | 1833 का चार्टर एक्ट | लॉर्ड विलियम बेंटिक (1833) | लॉर्ड कैनिंग (1858) | अखिल भारतीय नागरिक, सैन्य व संपूर्ण विधायी एकाधिकार |
| भारत का वायसराय व गवर्नर-जनरल | भारत सरकार अधिनियम, 1858 | लॉर्ड कैनिंग (1858) | लॉर्ड माउंटबेटन (1947) | ब्रिटिश क्राउन का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि + देशी रियासतों पर सर्वोच्चता |
| स्वतंत्र भारत का गवर्नर-जनरल | भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 | लॉर्ड माउंटबेटन (1947–48) | सी. राजगोपालाचारी (1948–50) | संवैधानिक राष्ट्राध्यक्ष (कैबिनेट की सलाह पर बाध्य) |
2. बंगाल के गवर्नर एवं गवर्नर-जनरल (1757–1833): प्रमुख नीतियां व युद्ध
1757 में प्लासी की विजय से लेकर 1833 के चार्टर एक्ट तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में क्षेत्रीय प्रसार और राजस्व दोहन की नींव रखी। इस काल के प्रमुख प्रशासक निम्नलिखित हैं:
2.1 रॉबर्ट क्लाइव (Robert Clive: 1757–1760 एवं 1765–1767)
- प्लासी का युद्ध (23 जून 1757): क्लाइव ने सिराजुद्दौला के सेनापति मीर जाफर, राय दुर्लभ और सेठ अमीचंद के साथ गुप्त षड्यंत्र रचकर बंगाल पर ब्रिटिश राजनीतिक प्रभाव की स्थापना की।
- इलाहाबाद की संधियां (अगस्त 1765): बक्सर के ऐतिहासिक युद्ध (1764 – मेजर हेक्टर मुनरो के नेतृत्व में) के बाद क्लाइव ने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय (12 अगस्त) और अवध के नवाब शुजाउद्दौला (16 अगस्त) के साथ संधियां कीं। सम्राट को ₹26 लाख वार्षिक पेंशन के बदले बंगाल, बिहार और ओडिशा की ‘दीवानी’ (राजस्व वसूली का अधिकार) प्राप्त हुई।
- बंगाल में द्वैध शासन प्रणाली (Dual System of Government: 1765–1772): क्लाइव ने प्रशासन को दो भागों में बांटा—दीवानी (राजस्व व नागरिक न्याय) कंपनी के हाथों में तथा निजामत (प्रशासनिक, पुलिस व फौजदारी न्याय) नवाब के हाथों में। अधिकार कंपनी के पास रहे और उत्तरदायित्व नवाब के पास, जिसके कारण बंगाल की अर्थव्यवस्था पूर्णतः तबाह हो गई और 1770 का भयानक अकाल पड़ा।
- सोसाइटी फॉर ट्रेड (1765): नमक, सुपारी और तंबाकू के आंतरिक व्यापार के एकाधिकार के लिए इस संस्था की स्थापना की।
- श्वेत विद्रोह (White Mutiny): मुंगेर और इलाहाबाद के अंग्रेज सैन्य अधिकारियों द्वारा ‘दोहरा भत्ता’ (Double Bhatta) बंद करने के विरोध में किया गया विद्रोह।
2.2 वॉरेन हेस्टिंग्स (Warren Hastings: 1772–1785)
🔑 बंगाल के प्रथम गवर्नर-जनरल (1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत):
- द्वैध शासन का अंत (1772): हेस्टिंग्स ने क्लाइव की द्वैध शासन व्यवस्था को समाप्त कर बंगाल का प्रत्यक्ष प्रशासनिक व वित्तीय प्रभार कंपनी के हाथों में लिया। नवाब की वार्षिक पेंशन ₹32 लाख से घटाकर ₹16 लाख कर दी और मुगल सम्राट की ₹26 लाख पेंशन बंद कर दी।
- 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट: कलकत्ता प्रेसीडेंसी को मद्रास व बॉम्बे से सर्वोच्च बनाया गया। 4 सदस्यीय गवर्नर-जनरल काउंसिल (क्लीवरिंग, मॉनसन, बारवेल, फिलिप फ्रांसिस) गठित की गई।
- कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट (1774): रेगुलेटिंग एक्ट की धारा 13 के तहत 1774 में फोर्ट विलियम में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई। सर एलिजा इम्पे (Sir Elijah Impey) प्रथम मुख्य न्यायाधीश बने (अन्य तीन न्यायाधीश: लेमेस्टर, चैम्बर्स व हाइड)।
- नंदकुमार पर अभियोग (न्यायिक हत्या): बंगाल के पूर्व दीवान राजा नंदकुमार ने हेस्टिंग्स पर घूसखोरी (मीर जाफर की विधवा मुन्नी बेगम से ₹3.5 लाख लेने) का आरोप लगाया। हेस्टिंग्स ने मुख्य न्यायाधीश एलिजा इम्पे के साथ साठगांठ कर नंदकुमार पर फर्जी जाली दस्तावेज का मुकदमा चलवाकर 1775 में फांसी पर लटकवा दिया (इतिहासकारों ने इसे ‘न्यायिक हत्या’ कहा)।
- एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल (1784): सर विलियम जोन्स द्वारा प्राच्य विद्या और भारतीय पांडुलिपियों के शोध के लिए स्थापना। चार्ल्स विल्किंस ने 1785 में श्रीमद्भगवद्गीता का अंग्रेजी अनुवाद किया (जिसकी भूमिका हेस्टिंग्स ने स्वयं लिखी)।
- प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775–1782) एवं सालबाई की संधि (1782): 20 वर्षों की शांति स्थापित हुई।
- द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1780–1784): हैदर अली की मृत्यु (1782), मंगलोर की संधि (1784) द्वारा समाप्त।
- रोहिल्ला युद्ध (1774) एवं पिट्स इंडिया एक्ट (1784): कंपनी के राजनीतिक मामलों के लिए 6 सदस्यीय ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल’ का गठन।
- महाभियोग (Impeachment 1788–1795): हेस्टिंग्स के निरंकुश और भ्रष्ट कार्यों (बनारस के राजा चेत सिंह और अवध की बेगमों के साथ लूट-खसोट) के विरुद्ध एडमंड बर्क, चार्ल्स जेम्स फॉक्स और शेरिडन ने ब्रिटिश संसद में महाभियोग चलाया, यद्यपि 1795 में उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
2.3 लॉर्ड कॉर्नवालिस (Lord Cornwallis: 1786–1793 एवं 1805)
🔑 ‘भारतीय सिविल सेवा एवं पुलिस व्यवस्था का जनक’:
- स्थाई बंदोबस्त / जमींदारी व्यवस्था (Permanent Settlement: 1793): सर जॉन शोर की योजना के आधार पर बंगाल, बिहार, ओडिशा, बनारस और उत्तरी कर्नाटक (ब्रिटिश भारत के 19% क्षेत्र) में लागू। जमींदारों को भूमि का स्थाई स्वामी माना गया। वसूल किए गए कुल लगान का 10/11 भाग कंपनी का तथा 1/11 भाग जमींदार का तय हुआ। इसमें ‘सूर्यास्त कानून’ (Sunset Law 1794) जोड़ा गया (निश्चित तिथि के सूर्यास्त तक लगान न देने पर जमींदारी नीलाम)।
- कॉर्नवालिस कोड (Cornwallis Code 1793): यह प्रसिद्ध संहिता ‘शक्तियों के पृथक्करण’ (Separation of Powers) के सिद्धांत पर आधारित थी। कलेक्टर से न्यायिक शक्तियां छीनकर उसे केवल राजस्व संग्रह तक सीमित किया गया और जिला स्तर पर नए ‘जिला न्यायाधीश’ (District Judge) के पद सृजित किए गए।
- पुलिस सुधार: जमींदारों के पुलिसिया अधिकारों को समाप्त कर जिले को 20 वर्ग मील के थानों में बांटा गया और प्रत्येक थाने में एक भारतीय ‘दरोगा’ की नियुक्ति की गई। जिले का सर्वोच्च पुलिस अधिकारी एसपी (Superintendent of Police) बनाया गया।
- तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1790–1792): टीपू सुल्तान को पराजित कर श्रीरंगपट्टनम की संधि (1792) की। कॉर्नवालिस का प्रसिद्ध कथन: “हमने अपने दोस्तों को शक्तिशाली बनाए बिना अपने शत्रु को पंगु बना दिया।” टीपू को अपना आधा राज्य और ₹3.30 करोड़ क्षतिपूर्ति देनी पड़ी।
- गाजीपुर में समाधि: 1805 में दूसरे कार्यकाल के दौरान गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) में कॉर्नवालिस की मृत्यु हुई, जहां आज भी उसका भव्य मकबरा स्थित है।
2.4 लॉर्ड वेलेजली (Lord Wellesley: 1798–1805)
🔑 ‘सहायक संधि प्रणाली’ (Subsidiary Alliance) का मुख्य शिल्पकार:
- सहायक संधि (Subsidiary Alliance System): भारतीय देशी रियासतों को ब्रिटिश सुरक्षा के नाम पर संप्रभुता-विहीन करने की नीति। फ्रांसीसी गवर्नर डुप्ले ने सबसे पहले भारतीय राजाओं को किराए पर सेना देने की प्रथा शुरू की थी, लेकिन वेलेजली ने इसे सुव्यवस्थित साम्राज्यवादी हथियार बनाया।
- सहायक संधि की प्रमुख शर्तें:
- देशी रियासत अपने विदेश संबंध कंपनी को सौंपेगी तथा कंपनी की अनुमति बिना किसी अन्य शक्ति से युद्ध या संधि नहीं करेगी।
- रियासत में एक ब्रिटिश सेना तैनात रहेगी जिसका खर्च रियासत नकद या भूमि का क्षेत्र देकर वहन करेगी।
- रियासत के दरबार में एक ब्रिटिश रेजीडेंट (Resident) रहेगा।
- रियासत किसी भी यूरोपीय (विशेषकर फ्रांसीसी) को कंपनी की अनुमति बिना सेवा में नहीं रखेगी।
- सहायक संधि स्वीकार करने वाले राज्यों का कालक्रम (UPSC का अति-महत्वपूर्ण प्रश्न):
- 1. हैदराबाद (1798 एवं 1800 – सर्वप्रथम संधि स्वीकार की)
- 2. मैसूर (1799 – चतुर्थ मैसूर युद्ध के बाद)
- 3. तंजौर (अक्टूबर 1799)
- 4. अवध (नवंबर 1801)
- 5. पेशवा बाजीराव द्वितीय (दिसंबर 1802 – बसीन की संधि)
- 6. भोंसले (दिसंबर 1803 – देवगांव की संधि)
- 7. सिंधिया (फरवरी 1804 – सुरजी-अर्जुनगांव की संधि)
- 8. जोधपुर, जयपुर, मछेड़ी, बूंदी तथा भरतपुर (1818 तक)
- चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध (1799): टीपू सुल्तान श्रीरंगपट्टनम के दुर्ग की रक्षा करते हुए 4 मई 1799 को वीरगति को प्राप्त हुआ। मैसूर के पुराने वोडेयार वंश के बालक कृष्णराज तृतीय के साथ सहायक संधि की गई।
- फोर्ट विलियम कॉलेज (1800): कलकत्ता में युवा ब्रिटिश प्रशासनिक अधिकारियों (ICS) को भारतीय भाषाओं और संस्कृति के प्रशिक्षण के लिए स्थापना।
- प्रेस पर नियंत्रण (Censorship of Press Act 1799): भारत में समाचार पत्रों पर पहली बार सेंसरशिप लागू की (संपादक व मुद्रक का नाम छापना अनिवार्य किया)।
2.5 लॉर्ड हेस्टिंग्स (Lord Hastings: 1813–1823)
🔑 ‘ब्रिटिश सर्वोच्चता’ (Paramountcy) का उद्घोषक:
- आंग्ल-नेपाल युद्ध (1814–1816) एवं संगोली की संधि (Treaty of Sagauli 1816): गोरखों को परास्त कर संगोली की संधि की। अंग्रेजों को गढ़वाल, कुमाऊं, नैनीताल, शिमला और रानीखेत के पर्वतीय क्षेत्र मिले तथा काठमांडू में ब्रिटिश रेजीडेंट नियुक्त हुआ।
- तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817–1818): मराठा परिसंघ का संपूर्ण विनाश। पेशवा बाजीराव द्वितीय को गद्दी से हटाकर ₹8 लाख वार्षिक पेंशन देकर बिठूर (कानपुर) भेज दिया गया। पेशवा पद समाप्त कर शिवाजी के वंशज प्रताप सिंह को सतारा की छोटी गद्दी दी गई।
- पिंडारियों का दमन (1817–1818): मध्य भारत में लूटपाट करने वाले पिंडारियों के प्रमुख नेताओं—चीतू, वासिल मोहम्मद और करीम खान का क्रूरतापूर्वक दमन किया (करीम खान ने आत्मसमर्पण किया, चीतू को जंगल में चीते ने खा लिया)।
- रैयतवाड़ी एवं महालवाड़ी व्यवस्था को स्वीकृति: 1820 में मद्रास के गवर्नर सर थॉमस मुनरो ने ‘रैयतवाड़ी व्यवस्था’ लागू की (किसान प्रत्यक्ष स्वामी, 51% भूभाग)। 1822 में होल्ट मैकेंजी द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत व पंजाब में ‘महालवाड़ी व्यवस्था’ (30% भूभाग, संपूर्ण गांव/महाल संयुक्त रूप से उत्तरदायी) को कानूनी मान्यता दी गई।
- बंगाल काश्तकारी अधिनियम (Bengal Tenancy Act 1822): किसानों को मनमाने निष्कासन से सुरक्षा प्रदान करने का पहला कानूनी प्रयास।
3. भारत के गवर्नर-जनरल (1833–1858): सामाजिक सुधार, हड़प नीति व आधुनिक अवसंरचना
1833 के चार्टर अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को पूर्णतः समाप्त कर उसे एक शुद्ध प्रशासनिक निकाय बना दिया और बंगाल के गवर्नर-जनरल को ‘भारत का गवर्नर-जनरल’ घोषित किया:
3.1 लॉर्ड विलियम बेंटिक (Lord William Bentinck: 1828–1835)
🔑 भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल (उदारवादी व सुधारवादी प्रशासक):
- 1833 का चार्टर एक्ट: बंगाल के गवर्नर-जनरल को संपूर्ण भारत का गवर्नर-जनरल बनाया गया। बंबई और मद्रास की कानून बनाने की शक्तियां छीन ली गईं। गवर्नर-जनरल की परिषद में चौथे सदस्य के रूप में ‘विधि सदस्य’ (Law Member – लॉर्ड मैकाले) को शामिल किया गया।
- सती प्रथा का अंत (Abolition of Sati 1829): राजा राममोहन राय के अथक प्रयासों से बेंटिक ने 4 दिसंबर 1829 को नियम XVII (Regulation 17) पारित कर सती प्रथा को अवैध और हत्या के समतुल्य दंडनीय अपराध घोषित किया (प्रारंभ में केवल बंगाल में, 1830 में बंबई व मद्रास में लागू)।
- ठगी प्रथा का दमन (1830): मध्य भारत में काली मां के नाम पर यात्रियों की रुमाल से गला घोंटकर हत्या करने वाले ठगों का दमन करने के लिए कर्नल विलियम स्लीमैन (Colonel Sleeman) को नियुक्त किया। स्लीमैन ने लगभग 1500 ठगों को गिरफ्तार कर इस कुप्रथा का संपूर्ण सफाया किया।
- मैकाले का शिक्षा प्रस्ताव (Macaulay’s Minute: 2 फरवरी 1835): प्राच्य-पाश्चात्य भाषा विवाद (Orientalist vs Anglicist) को समाप्त करते हुए अंग्रेजी को उच्च शिक्षा का आधिकारिक माध्यम बनाया। मैकाले ने ‘अधोमुखी निस्यंदन सिद्धांत’ (Downward Filtration Theory) प्रतिपादित किया (उच्च वर्ग को शिक्षित करो, ज्ञान रिसकर आम जनता तक पहुंचेगा)।
- कलकत्ता मेडिकल कॉलेज (1835): भारत में आधुनिक पाश्चात्य चिकित्सा शिक्षा के प्रथम संस्थान की स्थापना की।
- कुशासन के आधार पर राज्यों का विलय: बेंटिक ने 1831 में मैसूर, 1834 में कूर्ग (Coorg) तथा 1834 में कछार (Cachar) की रियासतों को कथित अव्यवस्था और कुशासन के आधार पर ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया।
3.2 सर चार्ल्स मेटकॉफ (Sir Charles Metcalfe: 1835–1836)
🔑 ‘भारतीय समाचार पत्रों का मुक्तिदाता’ (Liberator of the Indian Press):
- मेटकॉफ ने कार्यवाहक गवर्नर-जनरल के रूप में 1823 के कुख्यात जॉन एडम्स के प्रेस अध्यादेश को रद्द कर प्रेस अधिनियम 1835 (Press Act of 1835) पारित किया।
- भारतीय समाचार पत्रों को ब्रिटिश नियंत्रण से मुक्त कर खुली पत्रकारिता की अनुमति दी, जिसके कारण उन्हें ‘भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता’ कहा जाता है।
3.3 लॉर्ड ऑकलैंड एवं लॉर्ड एलेनबरो (1836–1844)
- लॉर्ड ऑकलैंड (1836–1842): प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध (1838–1842) की भयंकर विफलता (ब्रिटिश सेना का अफगान दर्रों में संहार)। शेरशाह सूरी मार्ग का जीर्णोद्धार करवाकर उसका नाम ‘ग्रैंड ट्रंक रोड’ (GT Road) रखा (कलकत्ता से दिल्ली)।
- लॉर्ड एलेनबरो (1842–1844):
- सिंध का विलय (अगस्त 1843): सर चार्ल्स नेपियर के नेतृत्व में सिंध के अमीरों को परास्त कर ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया। नेपियर ने अपनी डायरी में लिखा: “हमें सिंध को जीतने का कोई अधिकार नहीं है, फिर भी हम ऐसा करेंगे, और यह एक बहुत ही लाभदायक, उपयोगी और मानवीय बदमाशी होगी (A very advantageous, useful piece of rascality)।” नेपियर ने गवर्नर-जनरल को लैटिन शब्द “Peccavi” (अर्थात ‘मैंने पाप किया’ / ‘I have Sindh’) का संक्षिप्त तार भेजा।
- दासता का उन्मूलन (Abolition of Slavery 1843): 1843 के एक्ट V (Act 5 of 1843) द्वारा भारत में दास प्रथा को पूर्णतः अवैध घोषित कर दिया गया।
3.4 लॉर्ड डलहौजी (Lord Dalhousie: 1848–1856)
🔑 ‘हड़प नीति’ (व्यपगत का सिद्धांत) और ‘आधुनिक भारत का निर्माता’:
डलहौजी मात्र 36 वर्ष की आयु में गवर्नर-जनरल बना। उसका स्पष्ट उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य की सीमाओं को प्राकृतिक सीमाओं तक ले जाना और देशी रियासतों के स्वायत्त अस्तित्व को समाप्त करना था।
📌 व्यपगत का सिद्धांत (Doctrine of Lapse) क्या था?
इस सिद्धांत के अनुसार, कंपनी के अधीन आने वाले किसी भी आश्रित देशी राज्य के निःसंतान शासक को अपनी मृत्यु से पूर्व किसी बालक को गोद लेने (दत्तक पुत्र) का अधिकार नहीं होगा। शासक की मृत्यु के बाद उसका राज्य स्वतः ही ब्रिटिश साम्राज्य में विलीन (Lapse) हो जाएगा।
हड़पे गए राज्यों का कालक्रम (UPSC में बार-बार पूछा जाने वाला क्रम):
| क्र.सं. | राज्य का नाम | विलय का वर्ष | ऐतिहासिक संदर्भ / शासक |
|---|---|---|---|
| 1 | सतारा (Satara) | 1848 | अप्पा साहिब की मृत्यु के बाद सर्वप्रथम हड़पा गया राज्य |
| 2 | जैतपुर (बुंदेलखंड) व संभलपुर (ओडिशा) | 1849 | नारायण सिंह की मृत्यु (संभलपुर) |
| 3 | बघाट (Baghat – पंजाब/हिमाचल) | 1850 | (लॉर्ड कैनिंग ने इसे बाद में वापस लौटा दिया) |
| 4 | उदयपुर (Udaipur – मध्य प्रदेश) | 1852 | (कैनिंग द्वारा पुनः बहाल किया गया) |
| 5 | झांसी (Jhansi) | 1853 | गंगाधर राव की मृत्यु के बाद दत्तक पुत्र दामोदर राव को अमान्य किया |
| 6 | नागपुर (Nagpur) | 1854 | राघोजी तृतीय की मृत्यु; राजमहलों के आभूषणों व संपत्तियों की कलकत्ता में नीलामी |
अवध का विलय (Annexation of Awadh 1856):
अवध के नवाब वाजिद अली शाह के कई उत्तराधिकारी थे, अतः वहां हड़प नीति लागू नहीं हो सकती थी। डलहौजी ने ब्रिटिश रेजीडेंट सर जेम्स आउट्रम (James Outram) की रिपोर्ट के आधार पर ‘कुशासन और आंतरिक अराजकता’ का आरोप लगाकर फरवरी 1856 में अवध को ब्रिटिश साम्राज्य में हड़प लिया। यह निर्णय 1857 के महाविद्रोह का सबसे बड़ा राजनीतिक कारण बना, क्योंकि कंपनी की सेना में 75,000 सिपाही अकेले अवध के थे।
आधुनिक भारत की आधारशिला (Reforms & Modernization):
- भारतीय रेलवे का जनक: 16 अप्रैल 1853 को भारत में पहली यात्री रेलगाड़ी बॉम्बे (बोरीबंदर) से ठाणे के बीच 34 किमी की दूरी पर चलाई गई (ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे – GIPR द्वारा, तीन इंजन: सुल्तान, सिंध और साहिब)।
- इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ: 1853 में कलकत्ता से आगरा के बीच पहली टेलीग्राफ लाइन शुरू हुई। डॉ. ओ’शॉघनेसी को टेलीग्राफ विभाग का महानिदेशक बनाया गया।
- पोस्टल सुधार (Post Office Act 1854): भारत में आधुनिक डाक प्रणाली की शुरुआत; पूरे भारत में 2 पैसे की समान दर पर पत्र भेजने की व्यवस्था और पहली बार डाक टिकट जारी किए गए।
- वुड का शिक्षा डिस्पैच (Wood’s Despatch 1854): ‘भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा’। चार्ल्स वुड की सिफारिश पर प्राथमिक विद्यालयों में मातृभाषा, उच्च शिक्षा में अंग्रेजी तथा लंदन विश्वविद्यालय की तर्ज पर कलकत्ता, बंबई और मद्रास में 1857 में तीन विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई।
- लोक निर्माण विभाग (Public Works Department – PWD): सैन्य बोर्ड से अलग कर स्वतंत्र सिविल PWD की स्थापना। रुड़की में भारत का प्रथम इंजीनियरिंग कॉलेज (थॉमसन कॉलेज) खुला। 1854 में गंग नहर (Ganges Canal) का उद्घाटन हुआ।
- ग्रीष्मकालीन राजधानी: शिमला को ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी और सेना का मुख्य मुख्यालय बनाया।
- सिख व बर्मा युद्ध: द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध (1848–49) के बाद 29 मार्च 1849 को पंजाब का विलय किया और महाराजा दलीप सिंह से ऐतिहासिक ‘कोहिनूर हीरा’ लेकर महारानी विक्टोरिया को भेजा गया। 1852 में द्वितीय आंग्ल-बर्मा युद्ध में लोअर बर्मा (पेगू) पर अधिकार किया।
- विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856: पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से डलहौजी ने इस ऐतिहासिक कानून का मसौदा तैयार किया, जिसे उसके उत्तराधिकारी लॉर्ड कैनिंग ने जुलाई 1856 में (Act XV) पारित कराया।
4. भारत के वायसराय: 1858 से 1899 तक (क्राउन शासन, प्रतिक्रियावाद व राष्ट्रवाद का उदय)
1857 के महाविद्रोह के पश्चात ब्रिटिश संसद ने ‘बेहतर भारत सरकार अधिनियम 1858’ पारित किया। ईस्ट इंडिया कंपनी समाप्त हो गई और ब्रिटिश महारानी के प्रतिनिधि के रूप में ‘वायसराय’ का नया पद अस्तित्व में आया:
4.1 लॉर्ड कैनिंग (Lord Canning: 1856–1862)
🔑 भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल एवं प्रथम वायसराय (1858–1862):
- 1857 का महाविद्रोह: कैनिंग के कार्यकाल की सबसे युगांतरकारी घटना। विद्रोह को दबाने के बाद अंग्रेजों के प्रतिशोध के उन्माद को रोकने के कारण एंग्लो-इंडियन प्रेस ने व्यंग्य में उसका नाम ‘क्लीमेंसी कैनिंग’ (Clemency Canning / दयालु कैनिंग) रख दिया।
- महारानी विक्टोरिया का घोषणापत्र (1 नवंबर 1858): कैनिंग ने इलाहाबाद के भव्य दरबार में महारानी का ऐतिहासिक घोषणापत्र पढ़कर सुनाया। इसे ‘भारतीय जनता का मैग्नाकार्टा’ कहा गया। इसमें देशी रियासतों के विलय की नीति (हड़प नीति) को समाप्त करने, धार्मिक सहिष्णुता और कानून के समक्ष समानता का वचन दिया गया।
- विधि सुधार एवं संहिताबद्धता (Codification):
- भारतीय दंड संहिता (IPC 1860): लॉर्ड मैकाले द्वारा 1834 में तैयार किए गए प्रारूप को 1860 में कानून का रूप दिया गया (1 जनवरी 1862 से लागू)।
- आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC 1861) तथा सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC 1859) लागू की गई।
- भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम 1861 (High Courts Act): पुराने सुप्रीम कोर्ट और सदर अदालतों को समाप्त कर 1862 में कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में तीन उच्च न्यायालयों की स्थापना की गई।
- भारतीय परिषद अधिनियम 1861 (Indian Councils Act):
- पोर्टफोलियो प्रणाली (विभागीय प्रणाली) की शुरुआत: विभिन्न सदस्यों को अलग-अलग विभाग सौंपे गए।
- वायसराय को आपातकाल में अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति दी गई (अवधि 6 माह)।
- विधायी परिषद में पहली बार भारतीयों को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में नामित किया गया (1862 में बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव)।
- आयकर की शुरुआत (Income Tax 1860): भारत के प्रथम वित्त सदस्य जेम्स विल्सन (James Wilson) ने 1857 के युद्ध के वित्तीय घाटे को पाटने के लिए पहली बार भारत में आयकर लागू किया।
- पील आयोग (Peel Commission 1859): सेना के पुनर्गठन के लिए गठित। सेना में जाति और धर्म के आधार पर रेजिमेंटें बनाई गईं (‘बांटो और राज करो’) तथा यूरोपीय व भारतीय सैनिकों का अनुपात 1:2 (बंगाल) और 1:3 (मद्रास व बॉम्बे) निर्धारित किया गया। तोपखाने को पूर्णतः यूरोपीय नियंत्रण में रखा गया।
4.2 सर जॉन लॉरेंस एवं लॉर्ड मेयो (1864–1872)
- सर जॉन लॉरेंस (1864–1869):
- ‘शानदार निष्क्रियता’ / कुशल अकर्मण्यता की नीति (Policy of Masterly Inactivity): अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों में अहस्तक्षेप की प्रसिद्ध नीति अपनाई।
- 1865 में भारत और यूरोप के बीच फारस की खाड़ी द्वारा समुद्री टेलीग्राफ सेवा शुरू हुई।
- 1866 में ओडिशा के भीषण अकाल के बाद जॉर्ज कैंपबेल अकाल आयोग की स्थापना की।
- लॉर्ड मेयो (1869–1872):
- वित्तीय विकेंद्रीकरण का जनक (Father of Financial Decentralization 1870): पहली बार प्रांतीय सरकारों को जेल, पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा और सड़कों के प्रबंधन के लिए निश्चित बजट आवंटित किया गया।
- भारत की प्रथम प्रायोगिक जनगणना (First Census 1872): 1872 में मेयो के कार्यकाल में भारत में पहली बार जनगणना कराई गई।
- कृषि एवं वाणिज्य विभाग (1871): भारत में एक पृथक कृषि विभाग की स्थापना की। सर विलियम हंटर के नेतृत्व में ‘भारतीय सांख्यिकी सर्वेक्षण’ (Statistical Survey of India) शुरू हुआ।
- मेयो कॉलेज (अजमेर): भारतीय राजकुमारों और सामंतों की शिक्षा के लिए अजमेर में मेयो कॉलेज तथा काठियावाड़ में राजकोट कॉलेज खोला।
- पद पर रहते हत्या: 8 फरवरी 1872 को अंडमान-निकोबार के पोर्ट ब्लेयर की सेल्यूलर जेल का निरीक्षण करते समय अफगान कैदी शेर अली अफरीदी ने चाकू मारकर मेयो की हत्या कर दी (भारत का एकमात्र वायसराय जिसकी पद पर रहते हत्या हुई)।
4.3 लॉर्ड लिटन (Lord Lytton: 1876–1880)
🔑 सर्वाधिक साम्राज्यवादी व क्रूर प्रतिक्रियावादी वायसराय (उपनाम: ओवेन मेरेडिथ – साहित्यकार):
- 1876–1878 का भीषण अकाल: मद्रास, बंबई, मैसूर, हैदराबाद और पंजाब में अकाल से 50 लाख से अधिक लोग तड़प-तड़प कर मरे।
- प्रथम दिल्ली दरबार (1 जनवरी 1877): जब देश में अकाल से लाशें बिछी थीं, तब लिटन ने राजसी शानो-शौकत के साथ दिल्ली में भव्य दरबार सजाया और महारानी विक्टोरिया को ‘कैसर-ए-हिंद’ (Kaisar-i-Hind) की उपाधि दी (रॉयल टाइटल्स एक्ट 1876 के तहत)। कलकत्ता के एक समाचार पत्र ने लिखा: “जब रोम जल रहा था, तब नीरो बांसुरी बजा रहा था।”
- रिचर्ड स्ट्रेची अकाल आयोग (1880): अकाल राहत के लिए अकाल संहिता (Famine Code) और अकाल कोष के गठन की सिफारिश की।
- वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट 1878 (Vernacular Press Act – कुख्यात ‘गैगिंग एक्ट’): भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों पर कठोर प्रतिबंध लगाए। जिला मजिस्ट्रेट को अधिकार दिया गया कि वह किसी भी भारतीय भाषा के अखबार से बॉन्ड भरवा सकता है और आलोचना करने पर प्रिंटिंग प्रेस जब्त कर सकता है (मजिस्ट्रेट के आदेश के विरुद्ध कोर्ट में अपील का कोई अधिकार नहीं था)। शिशिर कुमार घोष का ‘अमृत बाजार पत्रिका’ रातों-रात बंगाली से अंग्रेजी अखबार में परिवर्तित हो गया ताकि इस कानून से बच सके!
- भारतीय शस्त्र अधिनियम 1878 (Indian Arms Act): भारतीयों के लिए बिना लाइसेंस हथियार (बंदूक, तलवार, कटार) रखना फौजदारी अपराध बना दिया गया, जबकि अंग्रेजों और एंग्लो-इंडियनों को पूर्ण छूट दी गई।
- आईसीएस (ICS) परीक्षा की आयु में कटौती: भारतीय मेधावी छात्रों को सिविल सेवा से बाहर रखने के लिए परीक्षा में बैठने की अधिकतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 19 वर्ष कर दी।
- द्वितीय आंग्ल-अफगान युद्ध (1878–1880): लिटन की आक्रामक ‘फॉरवर्ड पॉलिसी’ के कारण युद्ध भड़का और गंडमक की संधि (1879) हुई।
4.4 लॉर्ड रिपन (Lord Ripon: 1880–1884)
🔑 ‘भारत का उद्धारक’ एवं ‘स्थानीय स्वशासन का जनक’ (ब्रिटिश भारत का सर्वाधिक लोकप्रिय वायसराय):
ब्रिटिश उदारवादी प्रधानमंत्री ग्लैडस्टोन का प्रतिनिधि बनकर आया। फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने रिपन को “भारत का उद्धारक” (The Saviour of India) की संज्ञा दी थी।
- वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट को रद्द किया (1882): भारतीय भाषाओं के प्रेस को पुनः पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की।
- स्थानीय स्वशासन का मैग्नाकार्टा (Local Self-Government Resolution: 18 मई 1882): ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय बोर्ड और तालुकों तथा नगरों में नगरपालिकाओं (Municipalities) की स्थापना की। इनमें गैर-सरकारी सदस्यों का बहुमत रखा गया और चुनाव प्रणाली की शुरुआत की गई। रिपन को ‘भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक’ कहा जाता है।
- प्रथम नियमित दशकीय जनगणना (First Synchronous Census 1881): जनगणना आयुक्त डब्ल्यू. सी. प्लोडेन (W.C. Plowden) के नेतृत्व में भारत की पहली वैज्ञानिक और नियमित 10-वर्षीय जनगणना कराई गई (तब से हर 10 वर्ष में निरंतर जारी है)।
- प्रथम कारखाना अधिनियम (First Factory Act 1881): बाल श्रमिकों के संरक्षण के लिए पहला श्रम कानून। 7 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध; 7 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए कार्य-अवधि 9 घंटे प्रतिदिन तय की गई और महीने में 4 अनिवार्य छुट्टियां दी गईं।
- हंटर शिक्षा आयोग (Hunter Commission 1882): सर विलियम हंटर की अध्यक्षता में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के विकास व स्थानीय निकायों को प्राथमिक शिक्षा सौंपने की सिफारिश के लिए आयोग गठित किया।
- इल्बर्ट बिल विवाद (Ilbert Bill Controversy: 1883–1884):
- वायसराय की परिषद के विधि सदस्य सर सी. पी. इल्बर्ट ने 2 फरवरी 1883 को एक विधेयक पेश किया। इसका उद्देश्य न्याय व्यवस्था में नस्लीय भेदभाव को समाप्त करना था, जिसके तहत भारतीय जिला मजिस्ट्रेटों और सत्र न्यायाधीशों को यूरोपीय अपराधियों के मुकदमों की सुनवाई का अधिकार दिया गया।
- भारत में रह रहे अंग्रेजों और एंग्लो-इंडियनों ने इसे अपनी श्रेष्ठता पर आघात माना और इसके विरुद्ध देशव्यापी संगठित ‘श्वेत विद्रोह’ (White Mutiny) कर दिया। रिपन को बंधक बनाकर जहाज में बैठाकर लंदन भेजने तक की योजनाएं बनाई गईं।
- अंततः रिपन को झुकना पड़ा और विधेयक में संशोधन किया गया कि यदि कोई यूरोपीय चाहे तो वह ज्यूरी की मांग कर सकता है जिसमें कम से कम आधे (50%) सदस्य यूरोपीय होंगे।
- इस विवाद ने भारतीय राष्ट्रवादियों को सिखाया कि कैसे संगठित विरोध द्वारा ब्रिटिश सरकार को झुकाया जा सकता है, जिसने 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
- सिविल सेवा आयु: लिटन द्वारा घटाई गई 19 वर्ष की आयु को पुनः बढ़ाकर 21 वर्ष कर दिया।
4.5 लॉर्ड डफरिन एवं लॉर्ड लैंसडाउन (1884–1894)
- लॉर्ड डफरिन (1884–1888):
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना (28 दिसंबर 1885): सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक ए. ओ. ह्यूम (Allan Octavian Hume) द्वारा बॉम्बे के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में स्थापना। प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी (W.C. Bonnerjee) बने और प्रथम अधिवेशन में 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
- डफरिन ने प्रारंभ में कांग्रेस को सुरक्षा वाल्व (Safety Valve) माना, परंतु बाद में कांग्रेस की आलोचना करते हुए उसे “जनता के अत्यंत सूक्ष्म अल्पसंख्यक वर्ग (Microscopic Minority)” का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था कहा।
- तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध (1885): बर्मा के राजा थिबाव को बंदी बनाकर रत्नागिरी (महाराष्ट्र) भेज दिया गया और 1 जनवरी 1886 को संपूर्ण बर्मा का ब्रिटिश भारत में विलय कर दिया गया।
- बंगाल काश्तकारी अधिनियम 1885 पारित।
- लॉर्ड लैंसडाउन (1888–1894):
- डूरंड रेखा का निर्धारण (Durand Line 1893): सर मार्टिमर डूरंड के नेतृत्व में भारत (वर्तमान पाकिस्तान) और अफगानिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा खींची गई।
- द्वितीय कारखाना अधिनियम 1891: महिलाओं के लिए कार्य-अवधि 11 घंटे प्रतिदिन तय की गई तथा सप्ताह में एक दिन का अवकाश अनिवार्य किया गया। 9 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर प्रतिबंध।
- भारतीय परिषद अधिनियम 1892: अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की शुरुआत और भारतीय सदस्यों को बजट पर बहस करने तथा जनहित के मुद्दों पर प्रश्न पूछने का सीमित अधिकार दिया गया (पूरक प्रश्न और मतदान का अधिकार नहीं था)।
5. 20वीं सदी के वायसराय: कर्जन से स्वतंत्रता व गणतंत्र तक (1899–1950)
20वीं सदी के वायसरायों का कालक्रम भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उग्रवादी, गांधीवादी और अंतिम स्वतंत्रता संग्राम के चरणों का गवाह बना:
5.1 लॉर्ड कर्जन (Lord Curzon: 1899–1905)
🔑 सर्वाधिक कुशल परंतु कट्टर निरंकुश साम्राज्यवादी वायसराय:
- बंगाल का विभाजन (Partition of Bengal: 16 अक्टूबर 1905): कर्जन ने प्रशासनिक सुविधा का झूठा बहाना बनाकर बंगाल के हिंदू-मुस्लिम एकता पर चोट करने के लिए प्रांत को दो भागों में बांटा—पूर्वी बंगाल व असम (मुस्लिम बहुल, राजधानी ढाका) तथा पश्चिमी बंगाल (हिंदू बहुल, बिहार व ओडिशा सहित)। इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल से ऐतिहासिक ‘स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन’ शुरू हुआ और 16 अक्टूबर को समूचे बंगाल में ‘शोक दिवस’ व ‘राखी दिवस’ के रूप में मनाया गया।
- भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम 1904 (Indian Universities Act): सर थॉमस रैले आयोग (1902) की सिफारिशों पर विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण अत्यंत कड़ा किया ताकि उच्च शिक्षा संस्थान राष्ट्रवाद के केंद्र न बन सकें।
- प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम 1904 (Ancient Monuments Preservation Act): ऐतिहासिक इमारतों की मरम्मत व सुरक्षा के लिए कानून बनाया तथा सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को पुनर्जीवित किया।
- पुलिस व कृषि सुधार:
- 1902 में सर एंड्रयू फ्रेजर की अध्यक्षता में पुलिस आयोग का गठन किया जिसने सीआईडी (CID) की स्थापना की सिफारिश की।
- 1901 में सर कॉलिन स्कॉट-मॉनक्रीफ की अध्यक्षता में सिंचाई आयोग गठित हुआ।
- पूसा (बिहार) में केंद्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान तथा वाणिज्य व उद्योग विभाग की स्थापना की।
- तिब्बत में यंगहसबैंड मिशन (1904): रूसी प्रभाव को रोकने के लिए कर्नल फ्रांसिस यंगहसबैंड के नेतृत्व में सेना ल्हासा भेजी और दलाई लामा को ल्हासा की संधि के लिए बाध्य किया।
- किचनर विवाद व त्यागपत्र (1905): प्रधान सेनापति लॉर्ड किचनर के साथ वायसराय परिषद में सैन्य सदस्य के अधिकार को लेकर हुए विवाद के बाद कर्जन ने अगस्त 1905 में इस्तीफा दे दिया।
5.2 लॉर्ड मिंटो द्वितीय एवं लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय (1905–1916)
- लॉर्ड मिंटो द्वितीय (1905–1910):
- मार्ले-मिंटो सुधार / भारतीय परिषद अधिनियम 1909: मुसलमानों के लिए पहली बार धर्म के आधार पर ‘पृथक निर्वाचन मंडल’ (Separate Electorates) की व्यवस्था की। मिंटो को ‘भारत में सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक’ कहा जाता है। भारत सचिव मार्ले ने मिंटो को लिखा था: “हम नाग के दांत बो रहे हैं और इसका फल अत्यंत भीषण होगा।”
- मुस्लिम लीग की स्थापना (30 दिसंबर 1906): ढाका के नवाब सलीमुल्लाह, आगा खान और मोहसिन-उल-मुल्क के नेतृत्व में ब्रिटिश समर्थन से स्थापना।
- कांग्रेस का सूरत विभाजन (1907): रास बिहारी घोष की अध्यक्षता वाले अधिवेशन में कांग्रेस गरम दल (तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल) और नरम दल (गोखले, फिरोजशाह मेहता) में विभाजित हो गई।
- वायसराय की कार्यपालिका परिषद में शामिल होने वाले प्रथम भारतीय सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा (S.P. Sinha) विधि सदस्य के रूप में बने।
- लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय (1910–1916):
- तृतीय दिल्ली दरबार (दिसंबर 1911): ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मेरी के भारत आगमन पर आयोजित।
- बंगाल विभाजन रद्द (1911): उग्र राष्ट्रवाद के दबाव में बंगाल विभाजन को निरस्त किया गया; बिहार और ओडिशा को अलग प्रांत बनाया गया तथा असम को पुनः कमिश्नरी बनाया गया।
- राजधानी स्थानांतरण: भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की ऐतिहासिक घोषणा की गई (1912 में दिल्ली आधिकारिक राजधानी बनी)।
- दिल्ली बम कांड (23 दिसंबर 1912): चांदनी चौक में हार्डिंग के जुलूस पर रास बिहारी बोस और सचिंद्र सान्याल के नेतृत्व में बम फेंका गया। हार्डिंग घायल हुआ परंतु बच गया (बसंत कुमार बिस्वास, अवध बिहारी, अमीर चंद और बाल मुकुंद को फांसी दी गई)।
- गांधीजी की भारत वापसी: 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी 21 वर्षों के दक्षिण अफ्रीका प्रवास के बाद बंबई के अपोलो बंदरगाह पहुंचे (जिसे भारत में ‘प्रवासी भारतीय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है)।
- 1915 में पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा हरिद्वार में हिंदू महासभा की स्थापना हुई और 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का शिलान्यास हुआ।
- तृतीय दिल्ली दरबार (दिसंबर 1911): ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मेरी के भारत आगमन पर आयोजित।
5.3 लॉर्ड चेम्सफोर्ड एवं लॉर्ड रीडिंग (1916–1926)
- लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916–1921):
- मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार / भारत सरकार अधिनियम 1919:
- प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy in Provinces): प्रांतीय विषयों को ‘हस्तांतरित’ (Transferred – भारतीय मंत्रियों के अधीन) और ‘आरक्षित’ (Reserved – गवर्नर व उसकी परिषद के अधीन) में बांटा गया।
- केंद्र में द्विसदनीय विधायिका (Bicameralism) की शुरुआत: राज्य परिषद और केंद्रीय विधानसभा।
- महिलाओं को पहली बार सीमित मताधिकार दिया गया तथा केंद्रीय लोक सेवा आयोग की व्यवस्था की गई।
- रॉलेट एक्ट (मार्च 1919): सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता में ‘अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम’ पारित हुआ। इसे ‘बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील का काला कानून’ कहा गया (संदेह के आधार पर बिना वारंट किसी को भी अनिश्चितकाल तक जेल में रखने का अधिकार)।
- जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919): डॉ. सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में अमृतसर के जलियांवाला बाग में एकत्र निहत्थी भीड़ पर ब्रिगेडियर-जनरल रेजीनाल्ड डायर ने गोलियां चलवाईं जिसमें सैकड़ों लोग शहीद हुए। रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी ‘नाइटहुड’ की उपाधि और गांधीजी ने ‘कैसर-ए-हिंद’ पदक लौटा दिया। जांच के लिए हंटर कमेटी बनी।
- खिलाफत आंदोलन (1919) एवं असहयोग आंदोलन (1 अगस्त 1920): गांधीजी के नेतृत्व में पहला अखिल भारतीय जन-आंदोलन प्रारंभ हुआ।
- 1916 में लखनऊ समझौता (कांग्रेस-लीग पैक्ट व गरम-नरम दल का पुनर्मिलन), होम रूल लीग आंदोलन (तिलक व एनी बेसेंट), चंपारण सत्याग्रह (1917), अहमदाबाद मिल मजदूर व खेड़ा सत्याग्रह (1918) तथा सैडलर विश्वविद्यालय आयोग (1917)।
- मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार / भारत सरकार अधिनियम 1919:
- लॉर्ड रीडिंग (1921–1926): ब्रिटिश भारत का एकमात्र यहूदी वायसराय।
- चौरी-चौरा कांड (4 फरवरी 1922): गोरखपुर (यूपी) में उत्तेजित भीड़ ने थाने में आग लगाकर 22 पुलिसकर्मियों को जिंदा जला दिया। गांधीजी ने 12 फरवरी 1922 को बारदोली में असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया। गांधीजी को 6 वर्ष के कारावास की सजा हुई।
- स्वराज पार्टी का गठन (1 जनवरी 1923): कौंसिलों में प्रवेश कर सरकार के कार्यों में अड़ंगा लगाने के लिए चित्तरंजन दास (अध्यक्ष) और मोतीलाल नेहरू (महासचिव) ने इलाहाबाद में गठन किया। 1925 में विट्ठलभाई पटेल केंद्रीय विधानसभा के पहले भारतीय अध्यक्ष (स्पीकर) चुने गए।
- काकोरी ट्रेन एक्शन (9 अगस्त 1925): HRA के क्रांतिकारियों द्वारा काकोरी में सरकारी खजाने की लूट। रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी को दिसंबर 1927 में फांसी दी गई।
- केरल में मोपला विद्रोह (1921), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना (1925 – एम.एन. रॉय व सत्यभक्त) तथा नागपुर में डॉ. के. बी. हेडगेवार द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना (1925)।
- हिल्टन यंग आयोग (1926) की सिफारिश जिसने बाद में RBI की नींव रखी।
5.4 लॉर्ड इरविन एवं लॉर्ड वेलिंगटन (1926–1936)
- लॉर्ड इरविन (1926–1931):
- साइमन कमीशन (नवंबर 1927 नियुक्ति, 3 फरवरी 1928 भारत आगमन): 1919 के एक्ट की समीक्षा के लिए सर जॉन साइमन के नेतृत्व में 7 सदस्यीय आयोग। सभी सदस्य अंग्रेज होने के कारण देशव्यापी बहिष्कार हुआ (“साइमन वापस जाओ”)। लाहौर में पुलिस लाठीचार्ज में पंजाब केसरी लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हुए और 17 नवंबर 1928 को शहीद हो गए। बदला लेने के लिए भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव ने पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या की (17 दिसंबर 1928)।
- नेहरू रिपोर्ट (अगस्त 1928): पंडित मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में भारतीयों द्वारा संविधान निर्माण का पहला प्रयास। डोमिनियन स्टेटस व मौलिक अधिकारों की मांग। जवाब में जिन्ना ने 1929 में ’14 सूत्रीय मांगें’ रखीं।
- ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन (दिसंबर 1929): पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज’ को अपना अंतिम लक्ष्य घोषित किया। 31 दिसंबर 1929 की आधी रात को रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराया गया और 26 जनवरी 1930 को देश भर में पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
- दांडी मार्च एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन (12 मार्च – 6 अप्रैल 1930): गांधीजी ने साबरमती आश्रम से 78 अनुयायियों के साथ 240 मील की पदयात्रा कर दांडी में समुद्र तट पर मुट्ठी भर नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा।
- गांधी-इरविन समझौता (दिल्ली समझौता: 5 मार्च 1931): तेज बहादुर सप्रू और एम. आर. जयकर के प्रयासों से समझौता हुआ। सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित किया गया और गांधीजी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने को सहमत हुए।
- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत: 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में तीनों वीरों को फांसी दी गई।
- लॉर्ड वेलिंगटन (1931–1936):
- द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931): लंदन में आयोजित। गांधीजी कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि बनकर ‘एस.एस. राजपूताना’ जहाज से गए, परंतु सांप्रदायिक गतिरोध के कारण सम्मेलन विफल रहा। गांधीजी ने भारत लौटकर पुनः सविनय अवज्ञा आंदोलन छेड़ा, जिस पर वेलिंगटन ने कठोर दमन कर उन्हें यरवदा जेल भेज दिया।
- सांप्रदायिक पंचाट (Communal Award: 16 अगस्त 1932): ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्से मैकडोनाल्ड ने दलितों (दलित वर्गों) को हिंदुओं से अलग मानकर पृथक निर्वाचन मंडल देने की घोषणा की। गांधीजी ने यरवदा जेल में 20 सितंबर 1932 से ‘आमरण अनशन’ शुरू कर दिया।
- पूना पैक्ट (Poona Pact: 24 सितंबर 1932): मदन मोहन मालवीय, सी. राजगोपालाचारी और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयासों से महात्मा गांधी और डॉ. बी. आर. अंबेडकर के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ। पृथक निर्वाचन मंडल समाप्त किया गया तथा प्रांतीय विधानमंडलों में दलितों के लिए आरक्षित सीटें 71 से बढ़ाकर 147 और केंद्रीय विधायिका में 18% कर दी गईं।
- भारत सरकार अधिनियम 1935 (Government of India Act 1935):
- अखिल भारतीय महासंघ का प्रावधान।
- प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर ‘प्रांतीय स्वायत्तता’ (Provincial Autonomy) लागू की गई।
- केंद्र में द्वैध शासन लागू किया गया तथा विषयों को 3 सूचियों (संघीय, प्रांतीय, समवर्ती) में बांटा गया; अवशिष्ट शक्तियां वायसराय के पास रहीं।
- 1 अक्टूबर 1937 को दिल्ली में संघीय न्यायालय (Federal Court) की स्थापना हुई (सर मॉरिस ग्वेयर प्रथम मुख्य न्यायाधीश)।
- बर्मा (म्यांमार) को भारत से अलग किया गया तथा सिंध और ओडिशा दो नए प्रांत बने।
- भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना (RBI): 1 अप्रैल 1935 को भारतीय रिजर्व बैंक ने कार्य करना शुरू किया।
5.5 लॉर्ड लिनलिथगो, वेवेल एवं माउंटबेटन (1936–1948)
- लॉर्ड लिनलिथगो (1936–1943): ब्रिटिश भारत का सबसे लंबा कार्यकाल (7 वर्ष)।
- 1937 के प्रथम प्रांतीय चुनाव: 11 में से 8 प्रांतों (मद्रास, बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रांत, संयुक्त प्रांत, बंबई, असम, उत्तर-पश्चिम सीमांत) में कांग्रेस की सरकार बनी।
- द्वितीय विश्व युद्ध (1939): लिनलिथगो ने बिना भारतीयों की सहमति के भारत को युद्धरत घोषित कर दिया, जिसके विरोध में 22 अक्टूबर 1939 को सभी कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। मुस्लिम लीग ने 22 दिसंबर 1939 को ‘मुक्ति दिवस’ (Deliverance Day) मनाया।
- मुस्लिम लीग का लाहौर प्रस्ताव (23 मार्च 1940): स्वतंत्र मुस्लिम राष्ट्र (‘पाकिस्तान’) की औपचारिक मांग पारित की।
- अगस्त प्रस्ताव (8 अगस्त 1940): भारतीयों को युद्ध में समर्थन के बदले युद्धोपरांत डोमिनियन स्टेटस और संविधान सभा का वादा (कांग्रेस व लीग दोनों ने ठुकराया)।
- क्रिप्स मिशन (मार्च 1942): सर स्टैफोर्ड क्रिप्स युद्ध के बाद डोमिनियन स्टेटस का प्रस्ताव लाए। गांधीजी ने इसे “डूबते हुए बैंक का पोस्ट-डेटेड चेक” (A Post-dated Cheque on a Crashing Bank) कहा।
- भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement: 8 अगस्त 1942): बॉम्बे के ग्वालिया टैंक मैदान से गांधीजी ने ऐतिहासिक “करो या मरो” (Do or Die) का नारा दिया। 9 अगस्त की सुबह ‘ऑपरेशन जीरो आवर’ चलाकर सभी शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया (गांधीजी आगा खां पैलेस में, नेहरू व कार्यसमिति सदस्य अहमदनगर दुर्ग में नजरबंद)। बलिया में चित्तू पांडे, तामलुक में जातीय सरकार और सतारा में नाना पाटिल की समानांतर सरकारें बनीं।
- 1943 का बंगाल अकाल: ब्रिटिश युद्ध नीतियों और चावल की जमाखोरी के कारण 30 लाख से अधिक लोग भूख से तड़प कर मर गए।
- 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में आजाद हिंद फौज (INA) की बागडोर संभाली और आजाद हिंद सरकार बनाई।
- लॉर्ड वेवेल (1943–1947):
- वेवेल योजना एवं शिमला सम्मेलन (जून–जुलाई 1945): वायसराय परिषद के पुनर्गठन के लिए 21 भारतीय नेताओं की बैठक; जिन्ना की इस हठ पर कि सभी मुस्लिम सदस्य केवल लीग चुनेगी, सम्मेलन विफल हुआ।
- आईएनए पर लाल किला मुकदमा (नवंबर 1945): कर्नल प्रेम सहगल, कर्नल गुरबख्श सिंह ढिल्लों और मेजर शाहनवाज खान पर देशद्रोह का मुकदमा चला। बचाव पक्ष के वकीलों में भूलाभाई देसाई, तेज बहादुर सप्रू, के. एन. काटजू और जवाहरलाल नेहरू शामिल थे। देशव्यापी जन-उभार के कारण सेनापति ऑचिनलेक ने सजा माफ की।
- शाही नौसेना विद्रोह (RIN Mutiny: 18-23 फरवरी 1946): बॉम्बे के HMIS तलवार जहाज के नाविकों ने नस्लीय भेदभाव और खराब भोजन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। सरदार पटेल और जिन्ना की सलाह पर समर्पण किया।
- कैबिनेट मिशन (मार्च–मई 1946): पैथिक लॉरेंस (भारत सचिव), स्टैफोर्ड क्रिप्स और ए. वी. अलेक्जेंडर। पूर्ण पाकिस्तान की मांग खारिज की, त्रिस्तरीय संघ (ग्रुप A, B, C) प्रस्तावित किया और संविधान सभा के गठन का आधार तैयार किया।
- प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस (Direct Action Day: 16 अगस्त 1946): मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान प्राप्ति के लिए हिंसा का सहारा लिया; कलकत्ता और नोआखली में भयानक सांप्रदायिक कत्लेआम हुआ।
- अंतरिम सरकार (2 सितंबर 1946): पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में गठन; मुस्लिम लीग बाद में 26 अक्टूबर को शामिल हुई (लियाकत अली खान वित्त मंत्री बने)।
- संविधान सभा की प्रथम बैठक: 9 दिसंबर 1946 को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित (डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष; 11 दिसंबर को डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित)।
- क्लीमेंट एटली की घोषणा (20 फरवरी 1947): ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने हाउस ऑफ कॉमन्स में घोषणा की कि अंग्रेज जून 1948 से पहले भारत की सत्ता जिम्मेदार हाथों में सौंप कर भारत छोड़ देंगे।
- लॉर्ड माउंटबेटन (मार्च 1947 – जून 1948):
- ब्रिटिश भारत के अंतिम वायसराय एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल: माउंटबेटन को तेजी से सत्ता हस्तांतरण के लिए भारत भेजा गया।
- 3 जून योजना / माउंटबेटन योजना (विभाजन योजना): भारत के दो संप्रभु डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान में विभाजन की घोषणा की गई। पंजाब और बंगाल की विधानसभाओं ने विभाजन के पक्ष में मतदान किया। स्वतंत्रता की तिथि 15 अगस्त 1947 तय की गई।
- भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 (Indian Independence Act): 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद में पारित हुआ। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
- रेडक्लिफ सीमा आयोग (Sir Cyril Radcliffe): भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा (रेडक्लिफ रेखा) का निर्धारण किया गया।
- स्वतंत्रता के समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष जे. बी. कृपलानी थे तथा ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज षष्ठम (George VI) थे।
- चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (C. Rajagopalachari: जून 1948 – 26 जनवरी 1950):
- स्वतंत्र भारत के प्रथम एवं अंतिम भारतीय गवर्नर-जनरल: जून 1948 में माउंटबेटन के इंग्लैंड लौटने के बाद ‘राजाजी’ ने यह पद संभाला।
- 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूर्णतः लागू होने के साथ ही गवर्नर-जनरल का पद सदैव के लिए समाप्त हो गया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति बने।
6. परीक्षा उपयोगी तुलनात्मक चार्ट एवं ट्रिक्स (High-Yield UPSC/PCS Matrices)
UPSC और राज्य PCS प्रारंभिक परीक्षाओं में अक्सर गवर्नर-जनरलों की नीतियों, आयोगों और उनके कालक्रम पर सीधे कूट आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे दिए गए 4 मास्टर चार्ट्स को कंठस्थ करें:
6.1 सहायक संधि बनाम व्यपगत का सिद्धांत (कालक्रम तुलना)
🤝 सहायक संधि (वेलेजली: 1798–1805)
याद रखने की ट्रिक: “HM-TA – Peshwa Bhonsle Scindia”
- हैदराबाद (H): 1798 एवं 1800 (सर्वप्रथम)
- मैसूर (M): 1799 (टीपू की मृत्यु बाद)
- तंजौर (T): अक्टूबर 1799
- अवध (A): नवंबर 1801 (आधा राज्य सौंपा)
- पेशवा: 1802 (बसीन की संधि)
- भोंसले: 1803 (देवगांव की संधि)
- सिंधिया: 1804 (सुरजी-अर्जुनगांव)
- जोधपुर, जयपुर, भरतपुर: 1818 तक
⚔️ हड़प नीति / व्यपगत (डलहौजी: 1848–1856)
याद रखने की ट्रिक: “स-जै-सं-ब-उ-झा-ना”
- सतारा (स): 1848 (सर्वप्रथम हड़पा)
- जैतपुर (जै): 1849 (बुंदेलखंड)
- संभलपुर (सं): 1849 (ओडिशा)
- बघाट (ब): 1850 (हिमाचल/पंजाब)
- उदयपुर (उ): 1852 (मध्य प्रदेश)
- झांसी (झा): 1853 (दामोदर राव अमान्य)
- नागपुर (ना): 1854 (राघोजी तृतीय निःसंतान)
- अवध (विशेष): 1856 (कुशासन पर विलय)
6.2 ब्रिटिश भारत की 3 भू-राजस्व व्यवस्थाएं (Comparative Land Revenue Matrix)
| विशेषता | स्थाई बंदोबस्त (जमींदारी) | रैयतवाड़ी व्यवस्था | महालवाड़ी व्यवस्था |
|---|---|---|---|
| प्रवर्तक / गवर्नर-जनरल | लॉर्ड कॉर्नवालिस व जॉन शोर (1793) | थॉमस मुनरो व कैप्टन रीड (1820) | होल्ट मैकेंजी व मार्टिन बर्ड (1822) |
| ब्रिटिश भारत का भूभाग | 19% क्षेत्र | 51% क्षेत्र (सर्वाधिक) | 30% क्षेत्र |
| प्रमुख क्षेत्र | बंगाल, बिहार, ओडिशा, बनारस, उत्तरी कर्नाटक | मद्रास, बंबई, असम व कुर्ग | उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य प्रांत, पंजाब व अवध |
| भूमि का स्वामी | जमींदार (वंशानुगत) | रैयत (प्रत्यक्ष किसान) | समस्त गांव समाज (महाल/लंबरदार) |
| लगान का निर्धारण | सदैव के लिए निश्चित (10/11 कंपनी, 1/11 जमींदार) | उपज का 33% से 50% (20-30 वर्ष में पुनरीक्षण) | कुल उपज का 66% से 50% (महाल प्रमुख द्वारा) |
6.3 प्रमुख अकाल एवं शिक्षा आयोग (Chronology of Commissions)
| आयोग का नाम | वर्ष | संबंधित वायसराय | क्षेत्र / मुख्य सिफारिश |
|---|---|---|---|
| कैंपबेल अकाल आयोग | 1866 | सर जॉन लॉरेंस | ओडिशा अकाल की जांच, राहत कार्य में सरकारी जिम्मेदारी की शुरुआत |
| रिचर्ड स्ट्रेची अकाल आयोग | 1880 | लॉर्ड लिटन | अकाल राहत कोष (Famine Fund) व अकाल संहिता (Famine Code) का निर्माण |
| हंटर शिक्षा आयोग | 1882 | लॉर्ड रिपन | प्राथमिक शिक्षा का दायित्व स्थानीय निकायों (नगरपालिका/जिला बोर्ड) को देना |
| सर जेम्स लायल अकाल आयोग | 1897 | लॉर्ड एल्गिन द्वितीय | सिंचाई सुविधाओं के विस्तार व राहत मजदूरी में वृद्धि की सिफारिश |
| एंथोनी मैकडॉनेल अकाल आयोग | 1900 | लॉर्ड कर्जन | अकाल आयुक्त की नियुक्ति व कृषि बैंकों (Cooperative Banks) की स्थापना |
| थॉमस रैले विश्वविद्यालय आयोग | 1902 | लॉर्ड कर्जन | 1904 का भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित हुआ |
| सैडलर विश्वविद्यालय आयोग | 1917 | लॉर्ड चेम्सफोर्ड | कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं की जांच, 12वीं (इंटरमीडिएट) बोर्ड की सिफारिश |
| हार्टोग समिति | 1929 | लॉर्ड इरविन | प्राथमिक शिक्षा में ‘अपव्यय एवं अवरोधन’ (Wastage and Stagnation) की रोकथाम |
7. अभ्यास प्रश्न: UPSC एवं State PCS नवीनतम पैटर्न (High-Yield MCQs)
अपनी तैयारी को परखने के लिए निम्नलिखित विश्लेषणात्मक बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करें:
प्रश्न 1. लॉर्ड वेलेजली द्वारा प्रतिपादित सहायक संधि (Subsidiary Alliance) को स्वीकार करने वाले भारतीय राज्यों का सही कालानुक्रम कौन सा है?
(A) मैसूर → हैदराबाद → अवध → पेशवा बाजीराव द्वितीय
(B) हैदराबाद → मैसूर → अवध → पेशवा बाजीराव द्वितीय
(C) हैदराबाद → अवध → मैसूर → भोंसले
(D) मैसूर → तंजौर → हैदराबाद → सिंधिया
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (B)
व्याख्या: लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि को स्वीकार करने वाले प्रमुख राज्यों का कालक्रम है: हैदराबाद (1798), मैसूर (1799 – चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध के बाद), तंजौर (अक्टूबर 1799), अवध (नवंबर 1801), पेशवा बाजीराव द्वितीय (दिसंबर 1802 – बसीन की संधि), भोंसले (1803) तथा सिंधिया (1804)।
प्रश्न 2. लॉर्ड डलहौजी के ‘व्यपगत के सिद्धांत’ (Doctrine of Lapse) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इस नीति के तहत सर्वप्रथम 1848 में सतारा का विलय किया गया।
- झांसी का विलय गंगाधर राव के दत्तक पुत्र आनंद राव (दामोदर राव) के दावे को खारिज करके 1853 में किया गया।
- डलहौजी ने अवध का विलय भी व्यपगत सिद्धांत के तहत ही किया था क्योंकि नवाब वाजिद अली शाह का कोई वैध उत्तराधिकारी नहीं था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A)
व्याख्या: कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि अवध के नवाब वाजिद अली शाह के कई उत्तराधिकारी थे, अतः वहां हड़प नीति लागू नहीं हो सकती थी। अवध का विलय 1856 में जेम्स आउट्रम की रिपोर्ट के आधार पर ‘कुशासन और आंतरिक अव्यवस्था’ का आरोप लगाकर किया गया था।
प्रश्न 3. सूची-I (वायसराय) को सूची-II (ऐतिहासिक घटना) के साथ सुमेलित कीजिए:
| (a) लॉर्ड लिटन | 1. इल्बर्ट बिल विवाद एवं प्रथम नियमित जनगणना |
| (b) लॉर्ड रिपन | 2. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट एवं प्रथम दिल्ली दरबार |
| (c) लॉर्ड डफरिन | 3. मार्ले-मिंटो सुधार एवं पृथक निर्वाचन मंडल |
| (d) लॉर्ड मिंटो द्वितीय | 4. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885) |
कूट: (A) a-2, b-1, c-4, d-3 | (B) a-1, b-2, c-3, d-4 | (C) a-2, b-4, c-1, d-3 | (D) a-4, b-1, c-2, d-3
उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर: (A) a-2, b-1, c-4, d-3
व्याख्या: लॉर्ड लिटन = वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878) व प्रथम दिल्ली दरबार (1877); लॉर्ड रिपन = इल्बर्ट बिल (1883) व नियमित जनगणना (1881); लॉर्ड डफरिन = कांग्रेस की स्थापना (1885); लॉर्ड मिंटो द्वितीय = पृथक निर्वाचन मंडल (1909)।
8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ – People Also Ask)
❓ बंगाल के प्रथम गवर्नर-जनरल और भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल में क्या अंतर है?
1773 के रेगुलेटिंग एक्ट द्वारा ‘बंगाल का गवर्नर-जनरल’ पद सृजित हुआ और वॉरेन हेस्टिंग्स बंगाल के प्रथम गवर्नर-जनरल बने। इसके 60 वर्ष बाद 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल का पद बदलकर ‘संपूर्ण भारत का गवर्नर-जनरल’ कर दिया गया और लॉर्ड विलियम बेंटिक भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल बने।
❓ भारत का प्रथम वायसराय कौन था और यह पद कब बनाया गया?
भारत का प्रथम वायसराय लॉर्ड कैनिंग था। 1857 के महाविद्रोह के पश्चात ब्रिटिश संसद ने ‘भारत सरकार अधिनियम 1858’ पारित किया। इसके तहत ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर भारत का शासन सीधे ब्रिटिश महारानी (क्राउन) के अधीन आ गया और गवर्नर-जनरल को ब्रिटिश सम्राट का प्रतिनिधि मानते हुए ‘वायसराय’ (Viceroy) की उपाधि दी गई।
❓ ब्रिटिश भारत में किस वायसराय को ‘स्थानीय स्वशासन का जनक’ कहा जाता है?
लॉर्ड रिपन (Lord Ripon) को भारत में ‘स्थानीय स्वशासन का जनक’ कहा जाता है। उन्होंने 18 मई 1882 को स्थानीय स्वशासन पर ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कर ग्रामीण बोर्डों और नगरपालिकाओं की स्थापना की, गैर-सरकारी सदस्यों का बहुमत रखा और चुनाव प्रणाली की नींव रखी। रिपन ने वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट को भी रद्द किया था।
❓ सहायक संधि और व्यपगत के सिद्धांत (हड़प नीति) में क्या अंतर था?
सहायक संधि (वेलेजली): इसके तहत देशी राजा अपनी संप्रभुता और विदेश नीति अंग्रेजों को सौंपते थे और अपने राज्य में ब्रिटिश सेना रखते थे, परंतु राज्य का आंतरिक शासन राजा के हाथ में रहता था (हैदराबाद 1798 में प्रथम)।
व्यपगत का सिद्धांत (डलहौजी): इसके तहत निःसंतान राजा को दत्तक पुत्र (गोद लेने) की अनुमति नहीं थी और राजा की मृत्यु के बाद उसका संपूर्ण राज्य सीधे ब्रिटिश साम्राज्य में विलीन कर लिया जाता था (सतारा 1848 में प्रथम)।
❓ स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल और प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल कौन थे?
15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन बने। जून 1948 में माउंटबेटन के इंग्लैंड लौटने के बाद चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (सी. राजगोपालाचारी) स्वतंत्र भारत के प्रथम और अंतिम ‘भारतीय’ गवर्नर-जनरल बने। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ यह पद समाप्त हो गया।
गवर्नर-जनरल एवं वायसराय टॉपिक-वाइज टेस्ट सीरीज (10 Mock Tests)
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