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विशेष्य और विशेषण पहचानने के नियम UPPSC RO ARO सामान्य हिंदी नोट्स

विशेष्य और विशेषण पहचानने के नियम, भेद एवं 100 महत्वपूर्ण उदाहरण (UPPSC RO/ARO सामान्य हिंदी 60 अंक)

🔥 UPPSC RO/ARO सामान्य हिंदी (Paper 2) • 10 अंक पक्के

Table of Contents

विशेष्य और विशेषण: संपूर्ण नियम, प्रकार, संख्या गणना ट्रिक्स एवं 100 प्रामाणिक उदाहरण

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा आयोजित समीक्षा अधिकारी (RO) एवं सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य हिंदी प्रश्न-पत्र में कुल 60 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें ‘विशेष्य और विशेषण’ खंड से ठीक 10 प्रश्न (10 अंक) अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। इस खंड में अधिकांश अभ्यर्थी ‘विशेष्य-विशेषण बनाम विधेय-विशेषण’, ‘जटिल वाक्यों में विशेषणों की कुल संख्या गिनने’ तथा ‘संज्ञा से बनने वाले अप्रचलित विशेषणों’ में भ्रमित होकर अंक गंवाते हैं। यह संपूर्ण गाइड मानक हिंदी व्याकरण (कामताप्रसाद गुरु, डॉ. वासुदेव नंदन प्रसाद एवं डॉ. हरदेव बाहरी) तथा विगत 15 वर्षों के UPPSC हल प्रश्नों के विश्लेषण पर आधारित है।

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📑 विषय-सूची (Table of Contents)

  1. विशेष्य, विशेषण और प्रविशेषण: मूल परिभाषा, अंतर एवं पहचान।
  2. विशेषण के 4 मुख्य प्रकार: गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक एवं सार्वनामिक।
  3. संख्यावाचक विशेषण के 5 सूक्ष्म उपभेद: गणनावाचक, क्रमवाचक, आवृत्तिवाचक, समुदायवाचक व प्रत्येकबोधक।
  4. विशेष्य-विशेषण बनाम विधेय-विशेषण: स्थान का नियम, लिंग-वचन समन्वय व आयोग के भ्रमजाल।
  5. जटिल वाक्यों में विशेष्य और विशेषणों की संख्या गिनने की अचूक विधि: UPPSC के 5 जटिलतम प्रश्न डिकोडेड।
  6. परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले 100 महत्वपूर्ण विशेष्य-विशेषण शब्द युग्म (मास्टर तालिका)।
  7. UPPSC RO/ARO विगत 10 वर्षों के हल प्रश्न (Previous Years Solved Papers)।
  8. 10 अभ्यास बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी (Practice MCQs with Answers)।
  9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ Schema)।

1. विशेष्य, विशेषण और प्रविशेषण: मूल अवधारणा एवं अंतर

हिंदी व्याकरण में किसी वस्तु, व्यक्ति, स्थान अथवा भाव की दशा, गुण, रूप, आकार, संख्या अथवा परिमाण का बोध कराने वाले शब्दों को विशेषण कहा जाता है।

1. विशेषण (Adjective)

जो शब्द संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, परिमाण आदि) प्रकट करते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं।
उदाहरण: नीली गाय, विद्वान व्यक्ति, चार बालक।

2. विशेष्य (Modified Noun/Pronoun)

जिस संज्ञा अथवा सर्वनाम शब्द की विशेषता बताई जाती है, उसे व्याकरण में ‘विशेष्य’ कहते हैं।
उदाहरण: ‘नीली गाय’ में ‘गाय’ विशेष्य है। ‘विद्वान व्यक्ति’ में ‘व्यक्ति’ विशेष्य है।

3. प्रविशेषण (Intensifier)

जो शब्द किसी विशेषण की भी विशेषता प्रकट करते हैं, उन्हें ‘प्रविशेषण’ कहा जाता है।
उदाहरण: ‘कश्मीरी सेब सिंदूरी लाल होता है।’ (यहाँ लाल = विशेषण, सिंदूरी = प्रविशेषण, सेब = विशेष्य)।

⚠️ परीक्षा चेतावनी (Exam Trap): वाक्य में कभी भी ‘प्रविशेषण’ को विशेषणों की कुल संख्या में नहीं जोड़ा जाता! यदि प्रश्न पूछे कि “वह बहुत चतुर बालक है” में कितने विशेषण हैं, तो उत्तर केवल 1 (चतुर) होगा, क्योंकि ‘बहुत’ प्रविशेषण है।

2. विशेषण के 4 मुख्य प्रकार (Four Main Classifications)

मानक हिंदी व्याकरण के अनुसार विशेषण के मुख्य रूप से चार भेद होते हैं:

(A) गुणवाचक विशेषण (Adjective of Quality)

जिन विशेषण शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, रंग, रूप, आकार, काल, स्थान, दशा, स्वभाव आदि का बोध होता है, उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं। इसके प्रमुख रूप निम्नलिखित हैं:

  • गुण/दोष बोधक: भला, बुरा, भला-मानस, दानी, कृपण, सुशील, दुष्ट, पापी, पवित्र, परिश्रमी।
  • रंग बोधक: लाल, पीला, नीला, हरा, काला, सफेद, चमकीला, धुंधला।
  • आकार बोधक: गोल, चौकोर, सुडौल, नुकीला, लंबा, छोटा, चौड़ा, विशाल।
  • काल बोधक: नया, पुराना, प्राचीन, नवीन, ताजा, बासी, ऐतिहासिक, आधुनिक, दैनिक, साप्ताहिक।
  • स्थान बोधक: भारतीय, जापानी, इलाहाबादी, बनारसी, लखनवी, ग्रामीण, शहरी, देशी, विदेशी।
  • दशा बोधक: रोगी, स्वस्थ, दुर्बल, बलवान, अमीर, गरीब, पिघला, सूखा, गीला।
  • सादृश्य बोधक: सरीखा (उदा. ‘उसके सरीखा भाई’), सा, सी, से (उदा. ‘चांद सा मुखड़ा’)।

(B) संख्यावाचक विशेषण (Adjective of Number)

जिन विशेषण शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम की संख्या (गिनती) का बोध होता है, उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। इसके दो मुख्य भेद होते हैं:

  1. निश्चित संख्यावाचक: जिनसे निश्चित संख्या का ज्ञान होता है (जैसे- तीन छात्र, पांच पुस्तकें)।
  2. अनिश्चित संख्यावाचक: जिनसे निश्चित संख्या का ज्ञान नहीं होता (जैसे- कुछ लोग, कई छात्र, सब लड़के, सैकड़ों सैनिक, हजारों दर्शक)।

(C) परिमाणवाचक विशेषण (Adjective of Quantity)

जिन विशेषण शब्दों से किसी वस्तु की नाप-तौल (मात्रा) का बोध होता है, उन्हें परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं।

  • निश्चित परिमाणवाचक: दो लीटर दूध, पांच किलो गेहूं, चार गज मलमल, एक तोला सोना।
  • अनिश्चित परिमाणवाचक: थोड़ा पानी, बहुत घी, जरा सा नमक, ढेर सारा अनाज, सब धन।
💡 संख्यावाचक और परिमाणवाचक में अंतर पहचानने की अचूक ट्रिक:

यदि विशेष्य को गिनना (Count) संभव है (जैसे- पेड़, छात्र, रुपए, कुर्सियां), तो वह संख्यावाचक होगा (उदा. ‘सब पेड़’ = अनिश्चित संख्यावाचक)।
यदि विशेष्य को नापा या तौला (Measure/Weigh) जाता है और गिना नहीं जा सकता (जैसे- दूध, तेल, आटा, कपड़ा), तो वह परिमाणवाचक होगा (उदा. ‘सब दूध’ = अनिश्चित परिमाणवाचक)।

(D) सार्वनामिक या संकेतवाचक विशेषण (Demonstrative Adjective)

पुरुषवाचक और निजवाचक सर्वनामों (मैं, तू, आप) को छोड़कर अन्य सर्वनाम जब किसी संज्ञा से ठीक पहले आकर उसकी ओर संकेत करते हैं या उसकी विशेषता बताते हैं, तो उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहा जाता है।

  • मौलिक सार्वनामिक विशेषण: जो बिना रूपांतरण के संज्ञा से पूर्व आते हैं (उदा. ‘यह’ पुस्तक, ‘वह’ नौकर, ‘कोई’ व्यक्ति)।
  • यौगिक सार्वनामिक विशेषण: जो प्रत्यय लगकर बनते हैं (उदा. ‘ऐसा’ आदमी, ‘कैसा’ घर, ‘जैसा’ देश, ‘उतना’ काम)।

3. निश्चित संख्यावाचक के 5 सूक्ष्म उपभेद (आयोग का सर्वाधिक प्रिय क्षेत्र)

UPPSC RO/ARO की परीक्षाओं में सीधे संख्यावाचक न पूछकर उसके उपभेदों से प्रश्न पूछे जाते हैं। पंडित कामताप्रसाद गुरु के अनुसार निश्चित संख्यावाचक के 5 भेद हैं:

उपभेद (Sub-type)व्याकरणिक अर्थपहचान व उदाहरणपरीक्षा प्रश्न (PYQ)
1. गणनावाचक
(A) पूर्णांकबोधक
(B) अपूर्णांकबोधक
वस्तुओं की साधारण गिनती का बोध कराने वाले शब्द।पूर्णांक: एक, दो, दस, सौ, हजार।
अपूर्णांक: आधा, पौना, सवा, डेढ़, ढाई, चौथाई।
‘चौथाई’ शब्द में किस प्रकार का विशेषण है? ➔ अपूर्णांकबोधक (RO/ARO 2013)
2. क्रमवाचक (Ordinal)संख्या के क्रमिक स्थान (Order/Rank) का बोध कराने वाले शब्द।पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवां, दसवां।‘तीसरा’ शब्द में कौन सा विशेषण है? ➔ क्रमवाचक (RO/ARO 2013)
3. आवृत्तिवाचक (Multiplicative)एक वस्तु का दूसरी वस्तु से आधिक्य या गुणन (गुना) का बोध।दूना, तिगुना, चौगुना, दस गुना, सौ गुना।‘तिगुना लाभ’ में तिगुना क्या है? ➔ आवृत्तिवाचक
4. समुदायवाचक (Collective)संख्याओं के सामूहिक संकलन या ग्रुप का बोध कराने वाले शब्द।दोनों, तीनों, चारों, पांचों, सातों, दसों, दर्जन, शताब्दी।‘दोनों भाई’ में दोनों क्या है? ➔ समुदायवाचक
5. प्रत्येकबोधक (Distributive)अनेक वस्तुओं में से हर एक का अलग-अलग बोध कराने वाले शब्द।प्रत्येक, हर एक, एक-एक, सवा-सवा, प्रतिवर्ष।‘हर एक नागरिक’ में हर एक क्या है? ➔ प्रत्येकबोधक

4. विशेष्य-विशेषण (उद्देश्य) बनाम विधेय-विशेषण (मास्टर नियम)

वाक्य में विशेषण के स्थान (Position) के आधार पर विशेषण के दो रूप निर्धारित होते हैं। यह UPPSC RO/ARO का सबसे बड़ा विभेदकारी नियम है:

नियम 1: विशेष्य-विशेषण (उद्देश्य-विशेषण)

परिभाषा: जब विशेषण, विशेष्य (संज्ञा) से पहले आता है, तो उसे विशेष्य-विशेषण या उद्देश्य-विशेषण कहते हैं।

सूत्र: [विशेषण] + [विशेष्य]

• काला घोड़ा दौड़ रहा है। (काला = विशेष्य-विशेषण)
• चतुर बालक शांत बैठा है। (चतुर = विशेष्य-विशेषण)
• सफेद कमीज अलमारी में है। (सफेद = विशेष्य-विशेषण)

नियम 2: विधेय-विशेषण (Predicative Adjective)

परिभाषा: जब विशेषण, विशेष्य (संज्ञा) के बाद और क्रिया से पहले आता है, तो उसे विधेय-विशेषण कहते हैं।

सूत्र: [विशेष्य] + [विशेषण] + [क्रिया]

• घोड़ा काला है। (काला = विधेय-विशेषण)
• मेरा लड़का आलसी है। (आलसी = विधेय-विशेषण, RO/ARO 2014)
• रमेश की पुस्तक पुरानी है। (पुरानी = विधेय-विशेषण, RO/ARO 2014)

🔍 दोनों का एक साथ प्रयोग (संयुक्त उदाहरण):

वाक्य: “सफेद कमीज मैली हो गई।”
➔ ‘सफेद’ = कमीज (विशेष्य) से पहले आया है ➔ विशेष्य-विशेषण
➔ ‘मैली’ = कमीज (विशेष्य) के बाद और क्रिया (हो गई) से पहले आया है ➔ विधेय-विशेषण

5. जटिल वाक्यों में विशेषण एवं विशेष्य की संख्या गिनने की विधि

UPPSC RO/ARO में प्रत्येक वर्ष 2 से 3 प्रश्न एक लंबे वाक्य में कुल विशेषणों और विशेष्यों की संख्या गिनने पर पूछे जाते हैं। आइए विगत वर्षों के 4 सबसे जटिल प्रश्नों को चरणबद्ध तरीके से हल करें:

प्रश्न 1: ‘समुद्री जल में घातक परंतु बहुत कीमती जहर पाया जाता है।’ (UPPSC RO/ARO 2016)

हल एवं विश्लेषण:

  • विशेष्य पहचानें (कुल 2): 1. ‘जल’, 2. ‘जहर’।
  • विशेषण पहचानें (कुल 3):

    • 1. ‘समुद्री’ (जल की विशेषता बता रहा है ➔ विशेषण 1)

    • 2. ‘घातक’ (जहर की विशेषता बता रहा है ➔ विशेषण 2)

    • 3. ‘कीमती’ (जहर की दूसरी विशेषता बता रहा है ➔ विशेषण 3)
  • सावधानी: ‘बहुत’ शब्द ‘कीमती’ (विशेषण) की विशेषता बता रहा है, अतः ‘बहुत’ प्रविशेषण है, विशेषण नहीं!
  • अंतिम परिणाम: तीन विशेषण और दो विशेष्य।

प्रश्न 2: ‘सुगंधित कस्तूरी के लोभी शिकारी राजस्थानी हिरणों का अवैध शिकार करते हैं।’ (UPPSC RO/ARO 2016)

हल एवं विश्लेषण:

क्रमविशेषण पदविशेष्य पद (संज्ञा)
1सुगंधित (गुणवाचक)कस्तूरी
2लोभी (गुणवाचक)शिकारी
3राजस्थानी (स्थानवाचक गुण)हिरणों
4अवैध (गुणवाचक)शिकार

अंतिम परिणाम: चार विशेषण और चार विशेष्य।

प्रश्न 3: ‘भोले बालक ने क्रूर डाकू के कठोर हृदय में कोमल भावना जगा दी।’ (UPPSC RO/ARO 2016)

हल एवं विश्लेषण:

  • विशेषण (4): भोले, क्रूर, कठोर, कोमल।
  • विशेष्य (4): बालक, डाकू, हृदय, भावना।
  • अंतिम परिणाम: चार विशेषण और चार विशेष्य।

6. परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले 100 महत्वपूर्ण विशेष्य-विशेषण शब्द युग्म

UPPSC RO/ARO की परीक्षा में संज्ञा (विशेष्य) से विशेषण रूप बनाने वाले प्रश्न सर्वाधिक अंक कटवाते हैं। नीचे विगत 15 वर्षों के हल प्रश्नों एवं मानक व्याकरण ग्रंथों से संकलित 100 सर्वाधिक महत्वपूर्ण शब्द युग्म दिए गए हैं:

क्र.सं.विशेष्य (मूल संज्ञा)विशेषण (Adjective)क्र.सं.विशेष्य (मूल संज्ञा)विशेषण (Adjective)
1अग्निआग्नेय2ऋषिआर्ष
3शिवशैव4विष्णुवैष्णव
5भूमिभौमिक6इतिहासऐतिहासिक
7उपार्जनउपार्जित8अंचलआंचलिक
9गंगागांगेय10कर्कशताकर्कश
11आदिआदिम / आद्य12लोभलोभी / लुब्ध
13ग्रामग्रामीण / ग्राम्य14नगरनागरिक
15दूधदुधारू / दुधमुंहा16शरीरशारीरिक
17आत्माआत्मिक18परमात्मापारमार्थिक
19आयुआयुष्मान20बुद्धिबौद्धिक
21वेदवैदिक22पुराणपौराणिक
23नीतिनैतिक24धर्मधार्मिक
25अर्थआर्थिक26समाजसामाजिक
27कर्मकर्मठ / कर्मण्य28कामुकताकामुक
29कंठकंठ्य30तालुतालव्य
31दंतदंत्य32ओष्ठओष्ठ्य
33मूर्धामूर्धन्य34हृदयहार्दिक
35मनमानसिक36दिनदैनिक
37वर्षवार्षिक38मासमासिक
39सप्ताहसाप्ताहिक40पक्षपाक्षिक
41कुटुंबकौटुंबिक42संपादकसंपादकीय
43अधिकारआधिकारिक / अधिकृत44अनुरागअनुरागी
45अपमानअपमानित46अभिमानअभिमानी
47आसक्तिआसक्त48आकर्षणआकर्षक / आकृष्ट
49उपकारउपकारी / उपकृत50उपेक्षाउपेक्षित

7. UPPSC RO/ARO विगत 10 वर्षों के हल प्रश्न (Solved PYQs)

प्रश्न 1: ‘दशरथ के प्राण राम के लिए आकुल थे।’ इस वाक्य में मुख्य विशेष्य कौन सा है? (UPPSC RO/ARO 2016)

उत्तर: प्राण

व्याख्या: ‘आकुल’ (व्याकुल) विशेषण है जो ‘प्राण’ की विशेषता बता रहा है, अतः मुख्य विशेष्य ‘प्राण’ है।

प्रश्न 2: ‘ठंडा पानी ठंड पैदा करता है।’ इस वाक्य में विशेष्य कौन सा है? (UPPSC RO/ARO 2013)

उत्तर: पानी

व्याख्या: ‘ठंडा’ गुणवाचक विशेषण है और ‘पानी’ वह द्रव्यवाचक संज्ञा (विशेष्य) है जिसकी विशेषता प्रकट हो रही है।

प्रश्न 3: ‘वह नौकर नहीं आया।’ इस वाक्य में ‘वह’ कौन सा विशेषण है? (UPPSC RO/ARO 2014)

उत्तर: सार्वनामिक विशेषण

व्याख्या: ‘वह’ सर्वनाम ‘नौकर’ (संज्ञा) से ठीक पूर्व आकर उसकी ओर संकेत कर रहा है, अतः यह सार्वनामिक विशेषण है।

प्रश्न 4: ‘धुंधला’ शब्द में किस प्रकार का विशेषण है? (UPPSC RO/ARO 2014)

उत्तर: गुणवाचक विशेषण

व्याख्या: ‘धुंधला’ रूप/दशा/स्थिति के गुण का बोध कराता है (जैसे- धुंधला प्रकाश)।

प्रश्न 5: ‘युद्ध देखकर अशोक का कठोर हृदय मोम जैसा पिघल गया।’ इस वाक्य में विशेष्य कौन सा है? (UPPSC RO/ARO 2014)

उत्तर: हृदय

व्याख्या: ‘कठोर’ विशेषण ‘हृदय’ की विशेषता बता रहा है, अतः विशेष्य ‘हृदय’ है।

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8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

प्र. UPPSC RO/ARO परीक्षा में विशेष्य और विशेषण से कितने प्रश्न आते हैं?

उत्तर: UPPSC RO/ARO प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के सामान्य हिंदी (Paper 2) में विशेष्य और विशेषण खंड से ठीक 10 प्रश्न (10 अंक) अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

प्र. विशेष्य-विशेषण और विधेय-विशेषण में क्या मुख्य अंतर होता है?

उत्तर: जब विशेषण संज्ञा (विशेष्य) से पहले आता है (जैसे- ‘काला घोड़ा’), तो उसे विशेष्य-विशेषण (या उद्देश्य-विशेषण) कहते हैं। जब विशेषण संज्ञा के बाद और क्रिया से पहले आता है (जैसे- ‘घोड़ा काला है’), तो उसे विधेय-विशेषण कहते हैं।

प्र. प्रविशेषण किसे कहते हैं और क्या इसे विशेषण में गिना जाता है?

उत्तर: जो शब्द विशेषण की भी विशेषता बताते हैं, उन्हें प्रविशेषण कहते हैं (जैसे- ‘वह बहुत सुंदर है’ में ‘बहुत’)। परीक्षा में वाक्यों में विशेषणों की कुल संख्या गिनते समय प्रविशेषण को कभी भी विशेषण में शामिल नहीं किया जाता।

प्र. ‘ऋषि’ संज्ञा का सही विशेषण रूप क्या होता है?

उत्तर: ‘ऋषि’ संज्ञा शब्द का शुद्ध विशेषण रूप ‘आर्ष’ होता है (जैसे- आर्ष ग्रंथ, आर्ष वचन)। यह UPPSC परीक्षाओं में कई बार दोहराया गया प्रश्न है।


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